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Thursday, May 28, 2020

भाबी सेक्स स्टोरी: ज़िप में फंसा लंड-2

भाबी सेक्स स्टोरी: ज़िप में फंसा लंड-2

भाबी सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मेरी भाबी मेरे साथ सोई और बीच रात में उसने मेरे साथ सेक्स का खेल खेलना शुरू कर दिया. मैं तो पहले से ही भाबी की चुदाई चाहता था.

भाबी सेक्स स्टोरी के पहले भाग
ज़िप में फंसा लंड-1
में आपने पढ़ा कि मैं अपनी ससुराल गया हुआ था और मेरी सलहज अकेली मेरे साथ सोयी थी.

>भाबी ने एक रजाई मुझे दे दी और दूसरी रजाई में खुद और अपनी बिटिया के साथ लेट गई।

सोने से पहले भाबी ने कमरे का दरवाजा बंद कर दिया था और नाइट बल्ब जला दिया था जिससे कमरे में अंधेरा था और बहुत हल्का सा आस पास दिखाई दे रहा था.

सोते समय सीमा भाबी बोली- निखिल अगर रात में कोई प्रॉब्लम हो या किसी चीज की जरूरत पड़े तो मुझे उठा देना.
और गुड नाईट कह कर सो गई।

थोड़ी देर बाद मुझे भी नींद आ गई और मैं भी भाबी के मखमली जिस्म के बारे में सोचते हुए और उनकी ओर करवट लेकर सो गया।< अब आगे की भाबी सेक्स स्टोरी: रात को करीब 2 घंटे बाद मुझे अपनी नंगी जांघों पर कुछ गर्म गर्म सा महसूस हुआ. असल में जब मैं नींद से जगा तो मैंने पाया कि भाबी अपनी रजाई से निकल कर मेरी रजाई में आ गई है. उन्होंने मेरी तरफ अपनी पीठ घुमा रखी थी और उनके दोनों बड़े बड़े चूतड़ मेरी जांघों और मेरे लंड से पूरी तरह से सटे हुए थे. मैंने महसूस किया कि भाबी ने अपनी नाईटी ऊपर उठा रखी थी जिससे उनके चूतड़ एकदम नंगे थे और मेरा लंड तो पहले से ही एकदम नंगा था. उनकी गांड का मुलायम स्पर्श मिलते ही मेरा लंड फन फना कर लोहे की रोड की तरह सख्त हो कर बुरी तरह से अकड़ चुका था. कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था मुझे कि यह क्या हो रहा है. मैंने कभी ऐसा नहीं सोचा था कि मैं सीमा भाबी के साथ कभी इस हालात में भी लेटूँगा। मैं यह नहीं सोच पा रहा था कि अब क्या करूं ... या क्या ना करूं. मुझे लगा कि शायद सीमा भाबी गलती से मेरी रजाई में आ गई हो इसलिए मैं थोड़ी देर ऐसे ही चुपचाप लेटा रहा. लेकिन मेरा लंड वह बेताब था वह मेरे बस में नहीं था और सीमा भाबी के कोमल और मुलायम स्पर्श को पाकर मेरा लंड उनकी चूत में घुसने को बेताब था. उसी टाइम अचानक सीमा भाबी ने अपनी कमर थोड़ी सी हिलाई और मेरा लंड उनकी गांड की दरार में घुसने लगा. फिर थोड़ी देर बाद सीमा भाबी ने अपनी गांड थोड़े पीछे को सरका दी जिससे मेरा लंड और आगे तक उनकी गांड की दरार में सरक गया. मुझे महसूस हुआ कि शायद सीमा भाबी जग रही है और वह जानबूझकर मेरा लंड अपनी चूत में लेना चाहती है. मैंने धीरे से अपना एक हाथ उनके एक कूल्हे पर रख दिया. भाबी थोड़ी देर के लिए रुक गई, उन्हें लगा कि मैं नींद में हूं. तभी मैंने महसूस किया कि भाबी ने मेरा हाथ उठा कर अपने एक स्तन पर रख दिया. उनके बूब्स एकदम नंगे थे क्योंकि उन्होंने अपनी नाइटी के सामने वाले बटन खोल रखे थे. उनके बूब्स का स्पर्श पाकर मानो मेरे लंड में आग लग गई. तभी मैंने महसूस किया कि भाबी ने चूची पर रखे हुए मेरे हाथ को दबाया और अपनी टांग उठा कर मेरे लंड को दरार में घुसने के लिए जगह बना दी। इस आज़ादी के मिलने से मेरा लंड फनफनाने लगा और भाबी की जाँघों के अंदर की ओर सरकने लगा। तभी मैंने एक और चीज़ महसूस की कि मेरा नंगा लण्ड भाबी की नंगी जांघों के बीच की जगह में घुस रहा था और मैं अपने लंड को रोकने पर भी नहीं रोक पा रहा था। मैंने, जो हो रहा था, उसे रोकने की कोशिश छोड़ दी और इंतज़ार करने लगा कि आगे क्या होता है। लेकिन मुझे यकीन हो गया था कि आज भाबी सेक्स स्टोरी बन कर रहेगी. कुछ देर के बाद मैंने महसूस किया कि मेरा लंड भाबी की टांगों के बीच में चूत की फांकों के मुँह के पास पहुँच कर रुक गया था। तभी भाबी की टांग हिली और मैंने पाया कि मेरा लंड झट से भाबी की चूत के होटों से चिपक गया था। मेरे पसीने छुटने लगे थे। उस स्थिति में मैं क्या करूँ, मुझे समझ नहीं आ रहा था इसलिए मैं इंतज़ार करने लगा। कहते हैं कि इंतज़ार का फल मीठा होता है और मुझे जल्द ही महसूस होने लगा कि भाबी भी गर्म हो चुकी थी क्योंकि उसकी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था, जिसकी वजह से मेरा लंड भी गीला होने लगा था। तभी भाबी ने एक और हरकत की और अपने हाथ से मेरे लंड का सुपारा अपनी चूत के मुँह के आगे करके थोड़ा नीचे सरक गई। बस फिर क्या था, मेरा गर्म लंड भाबी की चूत के अंदर जाने को लपक पड़ा और देखते ही देखते मेरा लंड भाबी की चूत में दो इन्च तक अंदर घुस गया था। तभी भाबी का हाथ मेरे कूल्हे पर पड़ा और उन्होंने मुझे आगे सरकने के लिए दबा कर इशारा किया। फिर क्या था, मुझे तो खुली इजाजत मिल गई थी और मेरा सारा डर भाग गया था। मैं आहिस्ते से हिला और आगे की ओर सरका, जिससे मेरा लंड भी भाबी की चूत में और आगे घुसने लगा था। कुछ ही देर में मेरे कुछ धक्कों की वजह से मेरा लंड पूरा का पूरा भाबी की चूत के अंदर घुस गया था। भाबी शायद इतना लंबा और मोटा लंड लेने के लिए बैचन थी इसलिए उसके मुख से जोर से हाएईईई ... निकल गई। मैंने भाबी से आखिरकार बोल ही दिया- कैसा लग रहा है भाबी जान? भाबी बोली- हाय मेरे राजा ... मेरी चुदाई चालू रखो और तेज धक्के मारो मेरी चूत में। फिर क्या था, भाबी के मुख से ये शब्द सुनते ही मैं पूरे जोश से चुदाई में पिल गया और तेज तेज धक्के मारने लगा। चूत गीली होने के कारण फच फच की आवाज आ रही थी भाबी की चूत भी गर्म होने लगी थी और उसकी पकड़ लंड पर मज़बूत होती जा रही थी जिससे मेरे लंड को रगड़ भी ज्यादा लग रही थी। भाबी की उम्म्ह ... अहह ... हय ... ओह ... और उंहह्ह ... उंहह ह्ह्ह ... की आवाजें भी तेज होने लगी थी लेकिन मैंने इसकी परवाह किये बिना उनकी चुदाई चालू रखी। एक समय आया जब भाबी कि चूत एकदम चिकनी हो गई और मुझे लंड अंदर बाहर करने में बहुत मजा आने लगा। तभी भाबी एकदम अकड़ गई और उन्होंने अपनी दोनों टांगें सिकोड़ ली तथा जोर से चिल्ला भी पड़ी- आईईई ... ईईईईए ... मैं समझ गया कि भाबी का पानी छूट गया था। मैंने उनकी चुदाई थोड़ी और तेज कर दी और तब भाबी ने भी मेरा साथ देना शुरू कर दिया तथा अपने शरीर को मेरे धक्कों के साथ साथ हिलाने लगी। वह जोर जोर से आह्ह ... अह्ह ... उंहह्ह ह्ह्ह ... उम्हह्ह... की आवाजें भी निकालने लगी। अब चुदाई का आनन्द चार गुना हो गया था और मैं इस इंतज़ार में था कि कब मेरा छूटता है। अगले 5 मिनट तक मैं भाबी को उसी तरह चोदता रहा मुझे अक्सर झड़ने में 30 मिनट लगते हैं. तभी भाबी बोली- अब तुम नीचे आ जाओ और मैं तुम्हारे लंड पर बैठकर अब तुम्हारी चुदाई करूंगी. मैंने लंड बाहर निकाला और सीधा लेट गया. भाबी उठकर मेरे लंड पर बैठ गई और अपने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत में डालने लगी. उसके बाद भाबी ने अपनी गांड उठा उठा कर जोर जोर से धक्के मारना चालू कर दिया. वह अपनी गांड बहुत जोर जोर से ऊपर नीचे हिला रही थी. पूरा कमरा फच फच की आवाज से गूंज रहा था. भाबी धीरे से मेरे कान के पास आकर बोली- मुझे चुदाई करवाए हुए एक अरसा हो गया था. तुम्हारे भैया का तो अब सब कुछ खत्म है. वह तो अब दारू पीने के अलावा और कुछ काम कर ही नहीं सकते. वह तो मुझे ठीक से चोद भी नहीं पाते! मैं हमेशा से ही तुम्हारे बारे में सोचती रहती थी कि पता नहीं कब तुम्हारे लंड से अपनी चूत की प्यास बुझा पाऊंगी. और फिर जब आज मैंने देखा कि तुम्हारा लंड तो मेरे पति के लंड से कहीं ज्यादा लंबा और मोटा और ताकतवर है. तो मैं अपने होश खो बैठी. निखिल प्लीज मुझसे एक वादा करो कि तुम हमेशा मुझे बीच बीच में टाइम निकालकर ऐसे ही चोदने आते रहोगे. अगर मुझे तुम्हारा लंड नहीं मिला तो मैं मर जाऊंगी. अब मैं तुम्हारे लंड के बिना नहीं रह सकती. तुमने आज मेरे सारे सपने पूरे कर दिए हैं. इसी बीच वो कहने लगी- अब तुम मेरे ऊपर आ जाओ! मैं उनके ऊपर आकर उनकी चूत मारने लगा और मैं भी बोला- भाबी, मुझे भी तुम शुरू से ही बहुत ज्यादा पसंद थी. लेकिन मैं कभी तुमसे कुछ बोल नहीं पाता था. मुझे भी तुम्हारी चूत मार कर आज बहुत ज्यादा मजा आया है. एक परम आनंद की अनुभूति हुई है. मैं भी तुम्हें हमेशा चोदता रहूंगा. उन्होंने अपना एक स्तन पकड़कर उसका चूचुक मेरे मुंह में डाल दिया. फिर कुछ देर चूची चुस्वाने के बाद उन्होंने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी. उनकी चूत में मेरे लंड की स्पीड और तेज हो गई. इतना मजा आ रहा था कि बयां करना मुश्किल है. भाबी बोली- निखिल, तुम्हारे मोटे और लंबे लंड की कीमत एक औरत ही जानती है. जब मुझे लगा कि मेरा भी वीर्य छूटने वाला था, तब मैंने भाबी से पूछा- भाबी क्या मैं अपना वीर्य चूत के अंदर छोड़ूँ या बाहर निकालूँ? भाबी ने जवाब दिया- यार, अंदर ही छोड़ देना। बस फिर क्या था, मैंने भी भाबी की चुदाई फुल स्पीड से करनी शुरू कर दी और जैसे ही भाबी अकड़ कर आईईई ... ईईईईए ... आईईईए ... करती हुई छूटी, मैंने भी भाबी की प्यारी सी चूत के अंदर अपनी पिचकारी चला दी। वह पिचकारी इतनी चली और चलती ही गई कि मैं खुद हैरान हो गया था कि मेरे अंदर इंतना रस कहाँ से आ गया था जो मैं आज तक भी समझ न पाया। हम दोनों के छूटने का समय ने बहुत ही मेल खाया था और उस समय मैंने अपने जीवन का सबसे बड़ा आनन्द महसूस किया था। मैं इस आनन्द की अनुभूति भाबी के मुख पर भी देख रहा था. मैंने भाबी को चूमते हुए धीरे से कहा- आपने मुझे आज वो प्यार दिया है जो मुझे पहले कभी नहीं मिला. भाबी बोली- निखिल, यह प्यार में तुम्हें हमेशा ऐसे ही देती रहूंगी. बस तुम हमेशा मुझे ऐसे ही चोदते रहो. उसके बाद हमने एक घंटा रेस्ट किया और मैंने फिर भाबी की चूत मारी. फिर हम लोग सो गए. सुबह 5:00 बजे भाबी की आंख खुली. भाबी नहाने के लिए बाथरूम में घुसी तो उनके पीछे पीछे मैं भी बाथरूम में चला गया. मैंने भाबी के बूब्स चूसने शुरू कर दिया. भाबी मेरा लंड हाथ में पकड़ कर हिलाने लगी. मेरा लंड खड़ा होकर चूत में घुसने को बेकरार था. फिर भाबी ने नीचे बैठकर मेरा लंड अपने मुंह में ले लिया और उसको जोर जोर से चूसने लगी. फिर मैंने भाबी को दीवार के सहारे खड़ा कर दिया और पीछे से उनकी चूत नीचे बैठकर चाटने लगा. मुझे बड़ा मजा आ रहा था. भाबी के मुंह से उम्म्ह ... अहह ... हय ... ओह ... की सिसकारियां निकल रही थी. उसके बाद मैंने भाबी की चूत में खड़े खड़े ही पीछे से लंड पेल दिया. मैं खूब जोर जोर से भाबी की चूत में धक्के लगा रहा था. भाबी भी मेरे कूल्हे पकड़ कर अपनी गांड आगे पीछे कर रही थी मानो मुझसे कह रही थी कि बस उसे ऐसे ही चोदते जाओ. और फिर दोबारा मैंने भाबी की चूत में वीर्य गिरा दिया. फिर भाबी और मैं नहा कर नीचे चले गए. शाम को घर के सब लोग भी वापस आने वाले थे इसलिए उनके आने से पहले हमने एक बार और ऊपर कमरे में आकर चुदाई कर ली। भाबी अब बहुत खुश नजर आ रही थी. मैं भी भाबी की चुदाई करके मन ही मन बहुत खुश था. मुझे अब जब भी टाइम मिलता है, मैं भाबी की चुदाई करने पहुंच जाता हूं. आपको मेरी भाबी सेक्स स्टोरी कैसी लगी? मेहरबानी करके मुझे मेल कीजिए! 

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